Teachers Day Essay In Hindi

 शिक्षक दिवस भाषण व निबंध 

 Teachers Day Speech / Essay in Hindi

हमारे जीवन में एक शिक्षक कितना महत्त्वपूर्ण होता है इस बात को एलेक्जेंडर महान के इन शब्दों से समझा जा सकता है:

मैं जीने के लिए अपने पिता का ऋणी हूँ, पर अच्छे से जीने के लिए अपने गुरु का.

मित्रों, भारत भूमि पर अनेक विभूतियों ने अपने ज्ञान से हम सभी का मार्ग दर्शन किया है। उन्ही में से एक महान विभूति शिक्षाविद्, दार्शनिक, महानवक्ता एवं आस्थावान विचारक डॉ. सर्वपल्लवी राधाकृष्णन जी ने शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है। और उन्ही के जन्मदिन को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं। डॉ. राधाकृष्णन की मान्यता थी कि यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाय़े तो समाज की अनेक बुराईयों को मिटाया जा सकता है।

ऐसी महान विभूति का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाना हम सभी के लिये गौरव की बात है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के व्यक्तित्व का ही असर था कि 1952 में आपके लिये संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति का पद सृजित किया गया।

शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत : स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति जब 1962 में राष्ट्रपति बने तब कुछ शिष्यों ने एवं प्रशंसकों ने आपसे निवेदन किया कि  वे उनका जनमदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाना चाहते हैं। तब डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने कहा कि मेरे जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने से मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस करूंगा। तभी से 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ज्ञान के सागर थे। उनकी हाजिर जवाबी का एक किस्सा आपसे share कर रहे हैः—

एक बार एक प्रतिभोज के अवसर पर अंग्रेजों की तारीफ करते हुए एक अंग्रेज ने कहा – “ईश्वर हम अंग्रेजों को बहुत प्यार करता है। उसने हमारा निर्माण बङे यत्न और स्नेह से किया है। इसी नाते हम सभी इतने गोरे और सुंदर हैं।“ उस सभा में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी भी उपस्थित थे। उन्हे ये बात अच्छी नही लगी अतः उन्होने उपस्थित मित्रों को संबोधित करते हुए एक मनगढंत किस्सा सुनाया—

“मित्रों, एक बार ईश्वर को रोटी बनाने का मन हुआ उन्होने जो पहली रोटी बनाई, वह जरा कम सिकी। परिणामस्वरूप अंग्रेजों का जन्म हुआ। दूसरी रोटी कच्ची न रह जाए, इस नाते भगवान ने उसे ज्यादा देर तक सेंका और वह जल गई। इससे निग्रो लोग पैदा हुए। मगर इस बार भगवान जरा चौकन्ने हो गये। वह ठीक से रोटी पकाने लगे। इस बार जो रोटी बनी वो न ज्यादा पकी थी न ज्यादा कच्ची। ठीक सिकी थी और परिणाम स्वरूप हम भारतीयों का जन्म हुआ।”

ये किस्सा सुनकर उस अंग्रेज का सिर शर्म से झुक गया और बाकी लोगों का हँसते-हँसते बुरा हाल हो गया।

मित्रों, ऐसे संस्कारित एवं शिष्ट माकूल जवाब से किसी को आहत किये बिना डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने भारतीयों को श्रेष्ठ बना दिया। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का मानना था कि व्यक्ति निर्माण एवं चरित्र निर्माण में शिक्षा का विशेष योगदान है। वैश्विक शान्ति, वैश्विक समृद्धि एवं वैश्विक सौहार्द में शिक्षा का महत्व अतिविशेष है। उच्चकोटी के शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को भारत के प्रथम राष्ट्रपति महामहीम डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत रत्न से सम्मानित किया।

डॉ. राधाकृष्णन कहा करते थे-

पुस्तकें वो साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों  के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।

मित्रों, महामहीम राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के महान विचारों को ध्यान में रखते हुए  शिक्षक दिवस के पुनीत अवसर पर हम सब ये प्रण करें कि शिक्षा की ज्योति को ईमानदारी से अपने जीवन में आत्मसात करेंगे क्योंकि शिक्षा किसी में भेद नही करती, जो इसके महत्व को समझ जाता है वो अपने भविष्य को सुनहरा बना लेता है।

समस्त शिक्षकों को हम निम्न शब्दों से नमन करते हैं—

ज्ञानी के मुख से झरे, सदा ज्ञान की बात।

हर एक पंखुड़ी फूल, खुशबू की सौगात।।

धन्यवाद !

अनिता शर्मा
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 🙂  HAPPY TEACHER’s DAY  🙂 

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful write up on Teacher’s Day in Hindi with AKC.

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Full name  Dr. Sarvepalli Radhakrishnan
Born  5 Sept, 1888
Birthplace  Tirutani, Tamil Nadu
Died  17 Apr, 1975
Death place  Chennai, Tamil Nadu,
Parents  Sarvepalli V. Raswami, Sita Jha
Spouse  Sivakamu, Lady Radhakrishnan
Children  Five daughters and One son
Nationality
  Indian
Political party  Independent
Profession  Philosopher, professor
Work time  13 May, 1962 To 13 May, 1967
Education  M.A.
School/University
Voorhees College, University of Madras
Award   Bharat Ratna

Teachers Day Essay in Hindi

5 Sept को प्रतिवर्ष देश-भर में शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) मनाया जाता है। क्या आप जानते हैं कि शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) किसकी याद में Organize किया जाता है ? शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) का आयोजन देश के The Great Philosopher और उच्च कोटि के Educationist Dr. Sarvepalli Radhakrishnan के Birthday की स्मृति के रूप में मनाया जाता है।
स्वतंत्र भारत के First Vice President और Second president Dr. Sarvepalli Radhakrishnan का जन्म 5 Sept, 1888 को Tamil Nadu के एक पवित्र तीर्थ स्थल Tirutani ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम Sarvepalli V. Raswami और माता का नाम श्रीमती Sita Jha था। Raswami एक गरीब ब्राह्मण थे और Tirutani कस्बे के जमींदार के यहाँ एक साधारण कर्मचारी के समान कार्य करते थे। उनका परिवार भले ही गरीब था और साथ ही साथ इनके पिता धार्मिक विचारों वाले इंसान थे लेकिन उनकी पढ़ाई एक Christian School में हुई थी और उस समय पश्चिमी जीवन मूल्यों को Students में गहरे तक स्थापित किया जाता था. यही कारण है कि Christian School में Study करते हुए Radhakrishnan की Life में उन्नत विशेषताएं की मालिक होती चली गयी. और वह परंपरागत तौर पर ना सोच कर व्यहवारिकता की ओर उन्मुख हो गए थे. Education के प्रति रुजहान ने उन्हें एक मजबूत Personality दिया था. Dr. Radhakrishnan बहुत सारे विशेस्ताओं के मालिक होने के साथ साथ ही देश की Culture को प्यार करने वाले व्यक्ति भी थे.

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ज्ञान और शिक्षा के प्रति डॉक्टर राधाकृष्णन के मन में अपार स्थान था। यहीं कारण था कि प्रथम से लेकर अंतिम कक्षा तक उन्होंने प्रथम श्रेणी ही प्राप्त की।

शिक्षा और राजनीति में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए भारत के प्रथम राष्ट्रपति Dr. Rajendra Prasad जी ने महान दार्शनिक शिक्षाविद और लेखक Dr. Radhakrishnan को देश का सर्वोच्च अलंकरण “Bharat Ratna” प्रदान किया. Dr. Radhakrishnan के देहांत के बाद उन्हें March 1975 में US Government द्वारा Templeton Award से सम्मानित किया गया, जो कि धर्म के क्षेत्र में उत्थान के लिए प्रदान किया जाता है. इस Award को ग्रहण करने वाले यह First गैर-ईसाई सम्प्रदाय के व्यक्ति थे. उन्हें आज भी Education के Field में एक Ideal Teacher के रूप में याद किया जाता हैं.

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ऐसी महान विभूति का जन्मदिन (Birthday) शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) के रूप में मनाना हम सभी के लिये
गौरव की बात है। Dr. Rajendra Prasad जी के व्यक्तित्व का ही असर था
कि 1952 में आपके लिये संविधान के अंतर्गत Vice President का पद सृजित किया
गया। स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति जब 1962 में President बने तो उस वक़्त
कुछ Students ने एवं Fans ने आपसे Request किया कि  वे उनका जनमदिन
शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) के रूप में मनाना चाहते हैं। तब Dr. Radhakrishnan जी
ने कहा कि मेरे जन्मदिवस को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) के रूप में मनाने से मैं अपने आप
को गौरवान्वित महसूस करूंगा। तभी से 5 सितंबर को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) के रूप में
मनाया जाने लगा।

Teachers Day Quotes in Hindi

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